पूर्वज · बौद्ध धम्म
बौद्ध धम्म में पूर्वजों का स्मरण और पुण्यदान
By LumenOracle Editors · 10/19/2026 · 1 min read · Ancestors & Traditions

बौद्ध परंपरा में मोमबत्ती, अन्नदान और पुण्यदान से दिवंगतों को कैसे याद किया जाता है — कृतज्ञता का सरल अभ्यास।
पूर्वजों पर एक अलग दृष्टि
बुद्ध के धम्म में पूर्वजों के "दोष" या श्राप की बात नहीं है। इसके स्थान पर एक सौम्य अभ्यास है: दिवंगतों का स्मरण और पुण्यदान (पत्तिदान)।
पुण्यदान की विधि
- कोई सद्कर्म करें — भिक्षुओं या ज़रूरतमंदों को भोजन दें, किसी की मदद करें।
- घर के बुद्ध-स्थान पर मोमबत्ती और अगरबत्ती जलाएँ। मोमबत्ती प्रज्ञा से अंधकार दूर होने का प्रतीक है।
- मन में कहें: "यह पुण्य मेरे दिवंगत परिजनों को प्राप्त हो। वे सुखी हों।"
- एक पात्र से दूसरे में जल डालें (थेरवाद परंपरा) — बाँटने का प्रतीक।
- कुछ मिनट मैत्री ध्यान करें।
अलग-अलग परंपराएँ
- श्रीलंका व थाईलैंड — अंतिम संस्कार के बाद और वर्षगाँठ पर पुण्य-कर्म।
- उल्लम्बन / ओबोन (पूर्वी एशिया) — पूर्वजों के लिए दीप और अर्पण।
- भारत के आंबेडकरवादी बौद्ध — मोमबत्ती, बुद्ध वंदना और दान के साथ स्मरण।
इस अभ्यास का सार है — आज की करुणा, अतीत का डर नहीं।
मोमबत्ती सुरक्षित जलाएँ और कभी अकेला न छोड़ें।
Questions & answers
क्या बौद्ध पितृदोष मानते हैं?
पितृदोष वैदिक ज्योतिष की अवधारणा है। बौद्ध धम्म सद्कर्म और पुण्यदान से दिवंगतों को याद करने की शिक्षा देता है।
क्या अर्पित करें?
ज़रूरतमंदों या भिक्षुओं को भोजन, मोमबत्ती, फूल, अगरबत्ती — और सबसे बढ़कर करुणापूर्ण कर्म।
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